भारत की एंटी ड्रोन शील्ड पर पाकिस्तानी ड्रोन हमलों की चुनौती

दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ लो लेवल ड्रोन वारफेयर अपनाई है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान की तरफ से 800 से ज्यादा ड्रोन भारतीय हवाई सीमा में घुसे।

इनमें से भारतीय सुरक्षा बलों ने करीब 240 ड्रोन मार गिराए। ड्रोन ज्यादातर राजस्थान, पंजाब और जम्मू-कश्मीर के LoC के पास देखे गए।

5 ड्रोन हथियार या युद्ध सामग्री लेकर आए, 160 से ज्यादा अन्य सामान गिराने के लिए भेजे गए और लगभग 72 ड्रोन नशीले पदार्थ लेकर आए। जनवरी 2026 में अब तक 12 ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं सामने आई हैं।

सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर ड्रोन सर्विलांस के लिए आए थे। इनका मकसद भारतीय सेना की तैनाती और उसका पैटर्न पता करना था।

पाकिस्तान ऐसे सर्विलांस से आतंकियों की घुसपैठ के रास्ते तलाशता है। भारतीय सेना ने ड्रोन एक्टिविटी को रोकने के लिए हॉटलाइन और सैन्य वार्ता के जरिए आपत्ति दर्ज कराई है।

भारतीय सेना और वायु सेना ने एंटी ड्रोन सिस्टम की खरीद शुरू कर दी है। स्वदेशी डिफेंस कंपनी आईजी डिफेंस से हैंडहेल्ड एंटी ड्रोन जैमर खरीदे जा रहे हैं, जबकि डीआरडीओ द्वारा तैयार 16 एंटी ड्रोन लेजर सिस्टम LoC और पाकिस्तान सीमा पर तैनात किए जाएंगे।

पिछले दो हफ्तों में जम्मू-कश्मीर में LoC के पास पांच बार ड्रोन देखे गए। 20 जनवरी को कठुआ जिले में, 17 जनवरी को रामगढ़ सेक्टर में, 15 जनवरी को रामगढ़ में एक बार, 13 जनवरी को राजौरी जिले में दो बार और 11 जनवरी को नौशेरा, धरमसाल, रियासी, सांबा व पुंछ के मंकोट सेक्टर में पांच ड्रोन स्पॉट किए गए।

इन घटनाओं के बाद सेना ने अपने एंटी ड्रोन सिस्टम को सक्रिय किया और ड्रोन पाकिस्तान की ओर लौट गए। भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी और चौकसी बढ़ा रही हैं। LoC और पंजाब-राजस्थान सीमा पर ड्रोन हमलों की लगातार हो रही घटनाओं से भारतीय एंटी ड्रोन शील्ड की क्षमता और मजबूती की परीक्षा चल रही है।

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