गति परीक्षण, धड़धड़ाते हुए ही बिलासपुर से गुजरी ट्रेन, दुर्ग से झारसुगुड़ा पहुंची इतने घंटे में

बिलासपुर। दुर्ग से झारसुगुड़ा तक डाउन लाइन को परखने के लिए 130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेन चलाई गई। हालांकि स्टेशन में रफ्तार थोड़ी धीमी कर दी गई है। पर जितनी स्पीड से ट्रेन जोनल स्टेशन से गुजरी यात्रियों की नजर देखती रह गई। इसी रफ्तार से ट्रेन झारसुगुड़ा पहुंचेगी और वापसी में शुक्रवार को 130 किमी प्रतिघंटे की गति से ही अप लाइन से ट्रेन दुर्ग रेलवे स्टेशन तक पहुंचेगी। इस तरह दोनों लाइन का स्पीड ट्रायल हो जाएगा। शुक्रवार को हो बिलासपुर से दुर्ग के बीच मीडिल लाइन का परीक्षण किया जाएगा।

दुर्ग से झारसुगुड़ा के बीच की दूरी 320 किमी है। इस सेक्शन में ट्रेनों की गति बढ़ाने की कवायद है। इसके लिए पिछले कुछ सालों से ट्रैक मरम्मत से लेकर संरक्षा से जुड़े कई कार्य हो रहे थे। अब यह काम पूरा हो गया है और इंजीनियरिंग विभाग ने रिपोर्ट सौंपकर यह कहा है कि सेक्शन में ट्रेनों को 130 किमी की रफ्तार से चलाई जा सकती है। इसके लिए ट्रैक फिट है। हरी झंडी मिलते ही गुरुवार को डाउन लाइन का स्पीड ट्रायल किया गया। दुर्ग से बिलासपुर तक इतनी रफ्तार से पहुंची। हालांकि स्टेशनों में रफ्तार धीमी कर दी जा रही थी।

इसलिए जब जोनल स्टेशन से ट्रेन गुजरी तो उसकी रफ्तार लगभग 50 से 55 किमी प्रतिघंटे थी। अमूमन स्टेशन से 10 या 15 किमी की रफ्तार से ट्रेन चलती है। यही वजह है कि जब लाइन दो से ट्रेन गुजरी तो प्लेटफार्म पर खड़े यात्रियों की नजरें ट्रेन की तरफ हो गई। हालांकि यात्रियों को इसके बारे में जानकारी नहीं थी। पर ट्रेन गुजरते समय मौजूद रेलवे के अधिकारी व कर्मचारियों की भीड़ को देखकर कुछ यात्री खुद को नहीं रोक पाए। उन्हें बताया गया कि यह स्पीड ट्रायल है।

इसके बाद ट्रेनें इसी गति से चलेंगी। यात्री अभी जो समय लग रहा है, उससे एक से डेढ़ घंटे पहले गंतव्य पर पहुंचेंगे। वर्तमान में इस सेक्शन पर ट्रेनों की रफ्तार 80 से 110 किमी प्रतिघंटा है। रेलवे के अनुसार ट्रायल में 24 एलएचबी कोच की ट्रेन चलाई गई है।

 

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