रायपुर : छत्तीसगढ़ में 76% आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर राजभवन और राज्य सरकार आमने-सामने हैं। इस विधेयक को लेकर सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट कर कहा कि राज्यपाल संविधान का अपमान कर रही है। हमें संविधान और लोकतंत्र पर अटूट भरोसा है लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। हम जनता के बीच ही जाएंगे। भाजपा और राज्यपाल के बारे में जनता को बताएंगे।
राज्यपाल से सीएम ने हस्ताक्षर के लिए किया आग्रह
साथ ही उन्होंने कहा कि पारित आरक्षण संशोधन विधेयक अब विधानसभा की प्रॉपर्टी है। इसलिए राज्यपाल के प्रश्नों का कोई औचित्य नहीं है। फिर भी हमनें राज्यपाल की संतुष्टि के लिए उनके सवालों का जवाब भेजा है। लेकिन फिर से राजभवन मीडिया के जरिए राज्य सरकार द्वारा भेजे गए जवाबों के साथ ही सवाल पूछ दिए हैं। लेकिन मैं फिर राज्यपाल से आग्रह करता हूं हठधर्मिता छोड़ विधेयक पर हस्ताक्षर करें, जो राज्य के हित के लिए होगा।
सीएम भूपेश बघेल ने राज्यपाल के पास रखे तीनऑप्शन
सीएम ने संविधान अनुसार राज्यपाल के अधिकारों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनुच्छेद 167 (ख) में राज्यों के कार्यों के प्रशासन और विधि विधायी स्थापना संबंधी जानकारी राज्यपाल मांगे तो वह दिया जाए। लेकिन अब यह स्टेप पार हो चुका है। कारण विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया है। इसलिए अब यह विधेयक/ प्रॉपर्टी विधानसभा की है। सीएम भूपेश बघेल ने कहा अगर राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं करती तो संविधान अनुसार उनके पास तीन ऑप्शन है विधेयक को वापस लौटा दें, राष्ट्रपति को भेजें या अनिश्चितकाल तक अपने पास रख लें।











