फसल ख़राब होने से कर्ज में दबे किसानों ने की मुआवजे की मांग, शासन द्वारा अभी तक कोई आदेश नहीं

गरियाबंद : CG NEWS : पांडुका-किसानों के ऊपर एक बार फिर मायुसी और कर्ज तले दबते दिख रहे। पूरे प्रदेश में चैत्र नवरात्रि से लेकर अब तक चल रहे खराब मौसम और बारिश के चलते किसानों के फसल पानी मे डूब गया है। बूंदों से दाने झड़ रहे हैं ऐसे में रबी फसल ले रहे किसानों के माथे पर चिंता की लकीर दिखाई दे रही है। किसानों की फसल खराब होते देख अभी तक जिला के अधिकारियों द्वारा कोई ध्यान नही दिया जा रहा।

 

पाण्डुका क्षेत्र पिछले एक सप्ताह हुई तेज बारिश ने किसानों की आधी फसल खेत मे ही झड़ गए, बाकी बची हुई फसल खेत मे लेट गए, कईं जगहों पर खेत मे ज्यादा पानी भरने के कारण अभी भी पूरी फसल पानी मे डूबा पड़ा है। जिसे सूखने में भी समय लगेगा।

मार्च के अंतिम दिनों में हुई तेज बिन मौसम बारिश ने जहां गर्मी से थोड़ी राहत तो दी पर दूसरी ओर किसानों के मुह से निवाला छीनने कहावत सामने आ गयी है। जहाँ कटाई शुरू होना था वहां खेत लबालब भरे हुए है। ऐसे में किसानों के फसल झड़ने पर भी अधिकारियो के कान खड़े नई हो रहे ऐसे में पाण्डुका क्षेत्र के किसानों ने फसल मुवावजा की मांग तेज कर दी है। पिछले वर्ष पाण्डुका क्षेत्र में ऐसे कहि कुछ स्थानों पर ओला वृष्टि हुई थी जिसमे किसानों के पूरी फसल पिट गए थे लेकिन इस बार डेढ़ माह से रुक रुक हो रहे बारिश ने पूरी कर दी।

15 से 20 दिन नही होगी कटाई

क्षेत्र में देखा जाए तो लगातार तेज बारिश हवा के कारण फसल लेट गया है साथ ही फसल पानी में डूबने के कारण फसल में जराई अंकुर आने का डर सता रहा है जिससे फसल खराब बिक्री योग्य नही रहेगा ज्यादा पानी भरने और धूप कम निकलने के कारण 15 से 20 दिन पहले फसल कटाई कर पाना मुश्किल है।

जानवरो के लिए चारा पैरा की चिंता- किसानो को धान दानों के साथ साथ जानवरो की भी चिंता सता रही किसान अगर अपनी चैन वाली गाड़ी गीला खेत की फसल कटाई करवाते है तो इसमें किसानों को जानवरो के लिए पैरा भी उपलब्ध नही हो पाएगा जो गाड़ी चलने और पानी होने के कारण पैरा खेत मे ही सड़ जाएंगे जो जानवरो के खिलाने के लायक भी नही बचेगा ऐसे में जानवरों के खिलाने के कुछ नही बचेगा।

चैन गाड़ी में लागत अधिक बचत कर पाना मुश्किल

एक तरफ फसल खराब और दूसरी तरफ कर्ज से दबे किसानो हार्डवेस्टर की कटाई प्रति एकड़ 2300 से 2500 लिया जाता और ट्रेक्टर की 500 रुपये लागत आता है तो दूसरी ओर गीली जमीन में चलने वाली चैन गाड़ी में 3500 प्रति घण्टा व एक एकड़ की कटाई में डेढ़ से दो घण्टे लग रहे और ट्रेक्टर का अलग से लग रहा ऐसे में किसान चैन गाड़ी में फसल कटाने रुचि नही दिखा रहे है जो कर्ज को बढ़ा सकता है।

बीमारी से है परेशान

पिछले खरीफ की फसल में किसान तनकछेदा से परेशान थे, जिसमें किसानों ने नहर से रबी के लिए मांग की थी। जिस पर शाषन ने कोई ध्यान नहीं दिया ऐसे में अपनी सुविधा अनुसार रबी फसल लगाए लेकिन मौसम खराबी के चलते इस बार भी तनकछेदा,भूरा माहो,चाप जैसी खतरनाक बीमारी ने फसल बची रही कसर बिन मौसम बारिश ने पूरी कर दी जिस पर अभी भी किसान थोड़ी बहुत हाथ आ जाये सोच कर मंहगी से मंहगी दवाई छिड़काव कर रहे जिस पर कोई असर नही हो रहा ऐसे में किसानो का लागत और बढ़ गया जिसे चुका पाना मुश्किल से लग रहा है।

किसानों ने की मुवावजा की मांग

किट प्रकोप और बारिश के चलते फसल खराब होने को लेकर पाण्डुका क्षेत्र के किसानों ने मुवावजा की मांग की जिसमे मुख्य रूप भुनेश्वर साहू,सेवन साहू कुटेना,कुंजराम वर्मा,सुरेश साहू,विजय साहू,चांद साहू,डगेश्वर साहू, गोवर्धन साहू,बुधेश्वर साहू,डोमन साहू, भीम साहू, नीलकंठ यादव ,माधो निषाद,भुरू साहू, दुलार निषाद,मन्थिर साहू,तुलसी राम साहू,धनेश्वर साहू, राजू देवदास,उमेदि निषादआदि।

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