वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी… भूपेश बघेल जी ये कर लिया तो समझो आधी लड़ाई जीत ली

खबर है कि नगर निगम में भारी गड़बड़ी पाई गयी है। नाली बनाने और सीसी रोड निर्माण में लापरवाही और गड़बड़ी के चलते दो अधिकारियों को दण्डित किया गया है। गड़बड़ी के कारण एक को ‘बड़ी’ और एक को ‘बहुत बड़ी’ सजा मिली है। जी हां, एक को बड़ी सजा के रूप में निलंबित किया गया है और दूसरे को बहुत बड़ी सजा के रूप में तबादला किया गया है। जोन 6 के अधिकारी एसपी त्रिपाठी और सुधीर भट्ट को ये सजाएं दी गयी हैं।वस्तुतः तबादला, निलंबन सजा नहीं

 

माननीय मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी से एक बात के लिये आपसे हाथ जोड़कर एक निवेदन है। इससे जनता का भी फायदा होगा, देश, राज्य और राजधानी का भी फायदा होगा और आपका भी फायदा होगा। महोदय जिन अधिकारियों को तबादला और निलंबन किया गया है। उन्हें इससे  क्या कष्ट होगा ? कुछ भी नहीं। तबादले से क्या वेतन कम हो जाएगा ? बिल्कुल नहीं, जो काम वे यहां कर रहे हैं वही दूसरी जगह करेंगे, तो ये सजा क्या हुई ? सारी सुविधाएं सेम रहेंगी।
रहा सवाल निलंबन का तो निलंबन मंे वेतन कम मिलता है तो इससे इन्हें कोई तकलीफ नहीं है। इनके पास इतना पैसा होता है कि इनकी सात पुश्तें आराम से जीवन यापन कर लें। सात यदि ज्यादा कह दिया तो भी तीन-चार तो कर ही लेंगी। दूसरी बात निलंबित अधिकारी बड़ी मौज में रहता है। जीवन के पेण्डिंग वर्क निपटा लेता है।
बेटे-बेटियों की शादी की बात आगे बढ़ा लेता है। रिटायरमेन्ट के बाद कैसे कमाई करनी है, कहां ठेकेदारी करनी है ये सारी सेटिंग कर लेता है। और फिर जब काम पूरे हो गये, मन भर गया तो आराम से जुगाड़ लगाकर वापस नौकरी पर आकर उसी रूतबे से काम चालू कर लेता है।

लापरवाही की वजह रिश्वतखोरी

तो आपसे निवेदन ये है कि नाली और सड़क में जो हुआ है इसे लापरवाही कहा जा रहा है। ये लापरवाही और अनदेखी केवल रिश्वत मिलने पर ही की जाती है। रिश्वत लेकर ये ठेकेदार को आराम से काम करने की छूट दे देते हैं और फिर रिश्वत लेकर अनापत्ति और काम पूरा प्रमाण पत्र दे देते हैं। और बिल भी पास हो जाता है।

क्यों न ऐसा करें

क्यों न ऐसा किया जाए कि इन अधिकारियों से निगम को हुई आर्थिक हानि की वसूली की जाए। काम में लापवाही के कारणों का पता किया जाए और यदि रिश्वत ली गयी है तो अपराधिक मुकदमा चलाया जाए। जेल भेजा जाए। इससे पूरा सिस्टम सुधरेगा।
जनता खुश होगी। शहर और राज्य में मजबूरी में ही सही एक नयी परम्परा ईमानदारी से काम पूरा करने वाली पनपेगी और आपका ये फायदा होगा कि सामने चुनाव में फायदा मिलेगा। जनता को ये नया सिस्टम जिसमें सरकारी को सजा मिलते दिखेगी तो बड़ा सुकून मिलेगा। इससे पहले के पंद्रह सालों में प्रायः रिश्वतखोरों और बेईमानों को सजा नहीं मिलती थी। किसी न किसी बहाने सरकारी आदमी बच जाता था, जिसमें सरकार का पूरा संरक्षण प्राप्त होता  था।

जनता और अधिकारियों के लिये
समान सजा हो

निगत द्वारा किये गये गहरे गडृढे में डूबकर आदमी मर जाए तो किसी अधिकारी की गलती तय नहीं होती है। दूसरी तरफ कोई आम आदमी सड़क पर गड्ढा कर दे तो उससे निगम जुर्माना भरवा लेता है। महोदय हाल ही में एक         सरकारी अधिकारी की मोबाईल बांध में गिर गयी थी। अधिकारी का दुस्साहस देखिये कि उसने करोड़ों लीटर पानी बहवा दिया मोबाईल ढूंढने के लिये। उसे भी निलंबित किया गया है। पुूराना अनुभव बताता है कि उसे मामूली जुर्माना कर पुनः बहाल कर दिया जाएगा। क्या ये इंसाफ होगा ?
आप कृप्या ऐसे पक्षपात पर रोक लगाने का काम करें। निस्संदेह जनता इससे बेहद खुश होगी। जनता को यकीन दिलाएं की पिछली परम्पराओं को तोड़कर सरकारी को भी सजा मिलेगी। इन कार्यों को आपको भी चुनाव में अच्छा रिस्पाॅन्स मिलेगा। माननीय चुनावी समर में आप आज भी आगे हैं इससे और आगे आ जाएंगे। कृप्या सरकारी लोगों को भी उतनी ही सजा का प्रावधान कीजिये जितनी आम आदमी को मिलती है।

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