MP: बच्चा निकालने के बाद हिना खान के पेट में डॉक्टर ने छोड़ी निडल, 2 साल बाद पैदा हुआ दूसरा बच्चा तो खुला राज

MP News: मध्यप्रदेश के रीवा शहर में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है. यहां एक महिला ने संजय गांधी अस्पताल में पहली बार प्रसव किया था, लेकिन अस्पताल में हुई लापरवाही की वजह से उसका दर्द दो साल तक बढ़ता रहा. दरअसल, डॉक्टरों ने ऑपरेशन के दौरान महिला के पेट में एक सिलाई की पिन छोड़ दी थी, जो दो साल बाद उसकी दूसरी डिलीवरी के वक्त मिली.

हिना खान, जो रीवा के घोघर क्षेत्र की निवासी हैं, ने 5 मार्च 2023 को संजय गांधी अस्पताल में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया था. उस समय दोनों माँ और बच्चा स्वस्थ थे, और कुछ दिनों बाद हिना को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. हालांकि, घर लौटने के बाद हिना को पेट में तेज दर्द होने लगा. वह कई बार डॉक्टरों से मिली, जिन्होंने शुरुआत में कहा कि यह दर्द सर्जरी के बाद के टांकों के कारण हो सकता है, और इसे समय के साथ ठीक हो जाने का आश्वासन दिया.

2 साल बाद खुला राज

दो साल बाद जब हिना ने अपने दूसरे बच्चे को जन्म देने के लिए जिला अस्पताल का रुख किया, तब डिलीवरी के दौरान एक अजीब चीज सामने आई. डॉक्टर्स ने देखा कि महिला के पेट में एक सिलाई की पिन मौजूद थी, जो अब तक पता नहीं चल पाई थी. इससे यह साफ हो गया कि महिला ने पिछले दो वर्षों तक उस पिन के कारण दर्द सहा था, जो उसे इलाज के दौरान छोड़ी गई थी.

नवजात बच्चा हुआ जख्मी

इस घटना के बाद महिला के परिवार ने यह आरोप लगाया कि डिलीवरी के दौरान यह सिलाई की पिन नवजात बच्चे को भी नुकसान पहुंचा रही थी. बच्चे के शरीर पर कई तरह की चोटें आईं, और अब उसे वेंटिलेटर पर रखा गया है. यह स्थिति बहुत ही चिंताजनक है, क्योंकि नवजात को गंभीर हालत में रखा गया है.

जहां तक हिना की सेहत की बात है, तो वह अच्छी हालत में हैं और डॉक्टरों का कहना है कि उनका इलाज जारी रहेगा. हालांकि, उनके परिवार के लिए यह घटना एक बड़ा सदमा रही है, क्योंकि इस लापरवाही के कारण उनकी खुशी का पल दर्द और आक्रोश में बदल गया.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल

यह घटना अस्पतालों में लापरवाही और गलतियां बढ़ने की ओर इशारा करती है. हालात इस हद तक पहुंच गए हैं कि मरीजों को न केवल शारीरिक दर्द सहना पड़ता है, बल्कि उनके बच्चों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. डॉक्टरों की लापरवाही से इस तरह की घटनाओं में न केवल चिकित्सा पर विश्वास टूटता है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरा बढ़ता है.

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