Delhi Assembly Election: शुरू से लेकर अबतक…जानें किसने कब तक किया दिल्ली पर राज

Delhi Assembly Election: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में चुनावी बिगुल बज चुका है. चुनाव आयोग ने आज चुनाव की तारीख की भी घोषणा कर दी है. दिल्ली में 5 फरवरी को सभी 70 सीटों पर मतदान होंगे. जिसका नतीजा 8 फरवरी को जारी किया जाएगा. चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने सभी दिल्ली वासियों को दिल्ली से वोट देने की अपील की है.

दिल्ली चुनाव में मतदान देने से पहले आपको दिल्ली के इतिहास के बारे में जरूर पता होना चाहिए. आज हम आपको दिल्ली विधानसभा चुनाव की पूरी प्रोफाइल के बारे में बताएंगे. यहां कब-कब किसने चुनाव जीते और किस पार्टी ने राष्ट्रीय राजधानी में कितनी बार राज किया.

चुनाव की पूरी तैयारी 

चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीख के ऐलान से पहले मतदाताओं की फाइनल सूची जारी की गई. जिसके मुताबिक इस बार दिल्ली में कुल 1 करोड़ 55 लाख 24 हजार 858 वोटर हैं. 70 सीटों पर होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में 7.26 लाख वोटर्स ज्यादा है. वोटरों की संख्या लोकसभा चुनाव से भी ज्यादा है. इस बार मैदान में तीन पार्टियां उतर चुकी है. पहली पार्टी है सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी, दूसरी पार्टी केंद्र में राज कर रही भारतीय जनता पार्टी और वहीं तीसरी पार्टी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस है. तीनो पार्टियां अपनी पूरी कोशिश में जुटी है.

दिल्ली के पहले सीएम 

दिल्ली की इतिहास की बात करें तो यहां विधानसभा का गठन 1952 में किया गया था. उस दौरान अंतरिम विधानसभा की व्यवस्था लागू की गई थी. राष्ट्रीय राजधानी में पहले सीएम के रुप में ब्रह्म प्रकाश यादव कुर्सी पर बैठे. जिसके बाद 1955 में कांग्रेस पार्टी की ओर से गुरमुख निहाल सिंह को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया गया.जिनका कार्यकाल 1956 तक रहा. दिल्ली में 1966 में मेट्रोपॉलिटन काउंसिल अस्तित्व में आया. जिसके बाद 1993 में पहली बार विधानसभा चुनाव किया गया.

दिल्ली के पहले चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की थी. उस समय में मदन लाल खुराना को सीएम बनाया गया. हालांकि बीजेपी ने दिल्ली में पांच साल के कार्यकाल के दौरान तीन मुख्यमंत्री बदल दिए थे. भ्रष्टाचार के आरोप में खुराना को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी. इसके बाद साहिब सिंह वर्मा को सीएम पद सौंपा गया. हालांकि महंगाई के मुद्दे के कारण विरोध होने के बाद उन्हें इस्तीफा देने पड़ा इसके बाद सुषमा स्वराज ने दिल्ली की कमान संभाली. हालांकि वो केवल दो महीने के लिए ही सत्ता की कुर्सी पर बैठ पाई.

पहले चुनाव में दो महिलाओं का मुकाबला

1998 चुनाव में दिल्ली की सियासत में भारी बदलाव देखा गया. एक ओर बीजेपी ने सुषमा स्वराज का चेहरा आगे किया. वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से शीला दीक्षित को अपना नेता बनाया गया. जबरदस्त मुकाबले के बाद कांग्रेस की ओर से मैदान में उतरी शीला दीक्षित चुनाव जीत गई. उन्होंने 2013 तक दिल्ली की सत्ता संभाली. 2012-13 के दौर में कांग्रेस के ऊपर कई गंभीर आरोप लगे. जिसके बाद दिल्ली में दो सालों के लिए राष्ट्रपति शासन लग गया. हालांकि 2015 में 15 सालों तक राज करने वाली कांग्रेस पार्टी को नई नवेली पार्टी आम आदमी पार्टी ने सत्ता से उखाड़ फेंका. 70 सीटों में से आम आदमी पार्टी को 67 सीटों पर जीत मिली और कांग्रेस एक सीट भी नहीं जीत पाई. तब से लेकर अब तक दिल्ली में आम आदमी पार्टी का राज है. 2020 के बाद 2020 में भी कांग्रेस पार्टी जीरो पर आउट हो गई. वहीं बीजेपी ने बढ़त बनाते हुए 8 सीटों पर जीत हासिल की थी.

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025

अन्ना आंदोलन वाली आम आदमी पार्टी और अभी की आम आदमी पार्टी में काफी अंतर आ चुका है. ये वही आम आदमी पार्टी है जिसने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाकर दिल्ली में जीत हासिल की थी. लेकिन 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों ने एक गठबंधन (इंडिया) में चुनाव लड़ा. दोनों पार्टियों एक दूसरे के तारीफ में कई पुल बांधे. हालांकि जब बात दिल्ली की आई तो फिर दोनों अलग हो गए. एक बार फिर 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है. आप अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल जेल से निकलने के बाद सीएम पद से इस्तीफा देकर आतिशी को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद पर बिठा चुके हैं. उन्होंने वादा किया है कि जब तक जनता उन्हें दोबारा चुन कर नहीं लाती है तब तक वो कुर्सी पर नहीं बैठेंगे.

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