Pradosh Vrat 2025 : मार्च का पहला प्रदोष व्रत कब 11 या 12 मार्च ? जानें तारीख, महत्व और प्रदोष व्रत की पूजा विधि

प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित व्रत है जो प्रत्येक माह में आता है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन पूजा अर्चना करने से जीवन में सुख समृद्धि और कुशलता आती है। प्रदोष व्रत में प्रदोष काल में माता पार्वती और भगवान शिव का पूजा किया जाता है। आइए जानते हैं मार्च महीने का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा। साथ ही जानें पूजा विधि और फाल्गुन मास में आने वाले प्रदोष व्रत का महत्व।

कब है फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 11 मार्च को सुबह 8 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा और 12 मार्च को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त हो जाएगी। ऐसे में 11 मार्च को ही प्रदोष व्रत किया जाएगा। मंगलवार होने के कारण यह इसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। यह प्रदोष व्रत मार्च का पहला और फाल्गुन मास का अंतिम प्रदोष व्रत होगा।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,भौम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को मंगल दोष में कमी आती है। साथ ही व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आता है। भोम प्रदोष व्रत को शास्त्रों में बहुत ही पुण्यदायी मानी गई है। जो व्यक्ति प्रत्येक प्रदोष व्रत करता है उसे शिव धाम में स्थान मिलता है और उसके सारे पाप मिट जाते हैं। साथ ही व्यक्ति को अपनी समस्याओं का समाधान भी मिलता है।

भौम प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • भौम प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें।
  • अब पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ कर लें और इसके बाद एक लकड़ी की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर उसपर शिव परिवार की प्रतिमा स्थापित कर लें।
  • इसके बाद शिव परिवार की पूजा करें और भगवान शिव को बेल, पत्र, फूल, धूप आदि अर्पित करें। साथ ही माता पार्वती को वस्त्र और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। इसके बाद प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें।
    अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरुर करें।
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