मारकेल में रहने वाले एक छात्र को बीती रात किसी अज्ञात ने काट लिया, जिसे बेहतर उपचार के लिए महारानी अस्पताल लाया गया, जहां परिजनों ने आरोप लगाते हुए बताया कि रात में तैनात महिला डॉक्टर ने छात्र को भर्ती करने से मना करने के साथ ही वीआईपी से पहचान होने की बात कही। अगर वीआईपी से पहचान नहीं है तो यहां पर भर्ती नहीं किया जाएगा, साथ ही ग्लूकोज बॉटल को निकालने से स्टाफ नर्स को भी मना किया जा रहा था। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोपी भी लगाया है। मारकेल निवासी युवराज सेठिया 18 वर्ष को दरमियानी रात किसी अज्ञात ने हाथ में काट लिया, घटना की जानकारी लगते ही परिजनों ने देर रात ही महारानी अस्पताल इलाज के लिए पीड़ित को लेकर पहुंची, जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर निधि भंडारी थी। वहीं पीड़ित के पिता विजय सेठिया ने आरोप लगाते हुए बताया कि मरीज के नाम से जो पर्ची बनी थी। उसमें 18 वर्ष की जगह 50 वर्ष लिखा गया था। साथ ही छात्र को भर्ती करने से भी मना किया जा रहा था। जब परिजनों ने इलाज के लिए कहा तो डॉक्टर ने टेबल को पीटना शुरू कर दिया। वहीं डॉक्टर का कहना था कि रात के समय कोई भी डॉक्टर नहीं रहता है, इसे लेकर चले जाओ और जबरन कागज में साइन करने के लिए दबाव बना रही थे। वहीं ग्लूकोज बॉटल को भी पूरा लगने नहीं दिया जा रहा था। आधे अधूरे में ही मरीज को ले जाने की बात कही जा रही थी। वहीं पीड़ित की मां हेमलता सेठिया ने भी आरोप लगाते हुए बताया कि बच्चे को सही रूप से देखा भी नहीं जा रहा था, वहीं भर्ती करने से मना किया जा रहा था। ड्यूटी पर तैनात महिला डॉक्टर का कहना था कि यहां पर किसी भी तरह से कोई भी बिस्तर नहीं है। इलाज कराना है तो इसे रेफर कर दिया जा रहा है। वहीं ग्लूकोज खत्म होने पर जब स्टाफ नर्स ने बॉटल को निकालने के लिए गई तो उसी के ऊपर भड़क गई, जिससे बिना मेरे कहने के पहले क्यों बॉटल निकाल दी। इस मामले में पीड़ित का भाई जोगेंद्र सेठिया ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यहां पर मरीजों को किसी भी तरह से कोई भी इलाज नहीं किया जा रहा है, यहां के डॉक्टर इलाज के नाम पर रेफर का खेल खेल रहे हैं, शहर के लोगों को इस तरह से भगा दिया जा रहा है तो ग्रामीण अंचल से आने वाले मरीजों को कैसे ही अच्छा इलाज मिल पा रहा होगा। वहीं डॉक्टर के द्वारा इलाज की जगह बार बार टेबल पीट-पीटकर परिजनों को धमकाया भी जा रहा था। इलाज से पहले ही पेपर में साइन करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों ने इस घटना के बाद पीड़ित को डॉक्टर के द्वारा इलाज नहीं करने व भर्ती नहीं करने के कारण उसे निजी अस्पताल ले जाने की बात कही है। इस मामले में अस्पताल अधीक्षक डॉक्टर संजय प्रसाद का कहना था कि मरीज का इलाज चल रहा था, उसे रेफर करना चाह रहे थे, लेकिन परिजन उसे ले जाना नहीं चाहते थे, वहीं अगर किसी तरह से परिजनों को किसी बात को लेकर कहा गया है तो इस मामले को लेकर जांच किया जाएगा।
2025-07-16











