हरेली तिहार से खेती को नई दिशा, CM विष्णु देव साय बोले – गांव, गरीब और किसान हमारी प्राथमिकता

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान खेती-किसानी को संबल देने वाले सरकारी प्रयासों और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत हरेली तिहार पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांव, गरीब और किसान ही सरकार की पहली प्राथमिकता हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि खेती और किसान छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। राज्य सरकार ने बीते डेढ़ वर्षों में किसानों के हित में कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं, जिनमें 144.92 लाख मीट्रिक टन धान की रिकॉर्ड खरीदी और 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर 21 क्विंटल प्रति एकड़ खरीद शामिल है। साथ ही, रमन सरकार के बकाया धान बोनस की ₹3716.38 करोड़ राशि का वितरण कर किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी गई है।

उन्होंने हरेली तिहार को छत्तीसगढ़ की परंपरा और कृषि संस्कृति का प्रतीक बताया। सावन मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व से खेती का शुभारंभ होता है। खेती-बाड़ी के औजारों, जैसे – नांगर, गैंती, फावड़ा, कुदारी की पूजा की जाती है और गोधन (पशुधन) को औषधीय लोंदी खिलाई जाती है।

बच्चों व युवाओं के लिए गेड़ी चढ़ना, नारियल फेंक प्रतियोगिता, झूला, खो-खो जैसे पारंपरिक खेल हरेली के अभिन्न अंग हैं। लोहार, बैगा और यादव समाज की सक्रिय भूमिका से यह त्यौहार ग्रामीण समुदाय में सामूहिकता और परंपरा की भावना को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “जब किसान समृद्ध होंगे, तभी छत्तीसगढ़ प्रगति करेगा।” इस सोच के साथ राज्य सरकार न केवल खेती-किसानी को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पारंपरिक त्योहारों को भी जन-संवेदना से जोड़ रही है।

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