शराब न बिकने पर कर्मचारियों की सैलरी में कटौती, 80 लाख रुपए वसूलने का आदेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) ने रायपुर और दुर्ग की शराब दुकानों में “राइफल” और “पिस्टल” ब्रांड की शराब सप्लाई की थी, जो पिछले एक साल से बिक नहीं रही। अब बिक्री न होने पर कंपनी ने प्लेसमेंट एजेंसी को जिम्मेदार ठहराया और बीआईएस के माध्यम से 80 लाख रुपए की वसूली का आदेश जारी किया।

प्लेसमेंट कंपनी ने कर्मचारियों पर फाइन तय कर दी है। सुपरवाइजर पर 10 हजार, सेल्समैन पर 7 हजार और मल्टी-टास्क स्टाफ पर 5 हजार रुपए की कटौती की जाएगी। इससे कर्मचारियों की सैलरी से करीब 64.4 लाख रुपए कटेंगे। कर्मचारियों में हड़कंप मच गया और वे बुधवार को काम करने से इनकार कर दिए थे, लेकिन बाद में समझौते के बाद लौटे।

कंपनी का आरोप है कि पुराने स्टॉक समय पर नहीं बिक पाया और पिस्टल-राइफल जैसे उत्पादों की बिक्री पर कोई लिमिट न होने से सिस्टम में असंतुलन हुआ। करीब 1.40 करोड़ रुपए का स्टॉक फंस गया।

कर्मचारी कहते हैं कि वेतन इतना कम है कि इतनी राशि काटना मुश्किल है। अधिकांश ने लोन लिए हुए हैं, बच्चों की फीस और घर खर्च के लिए भी पैसे चाहिए। जुर्माना एक साथ लगाने से नाराजगी बढ़ी है।

सीएसएमसीएल के तहत करीब 250 अलग-अलग ब्रांड की शराब बिकती है, जिनमें कुछ बिल्कुल ग्राहकों को पसंद नहीं हैं। विभाग का तर्क है कि राजस्व का नुकसान न हो और नियम के अनुसार, नुकसान की भरपाई जरूरी है। इस आधार पर कंपनी 75 प्रतिशत और कर्मचारी 25 प्रतिशत रकम देंगे।

आबकारी विभाग के प्रभारी उपायुक्त राजेश शर्मा और बीआईएस के डीजीएम हर्ष लाल द्विवेदी ने कहा कि उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि सिस्टम को पटरी पर लाना है ताकि भविष्य में डेमरेज और नुकसान न हो। कर्मचारियों की जिम्मेदारी है कि वे ब्रांड ग्राहकों के सामने रखें और बेचें।

Share this news:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *