CBI की बड़ी कार्रवाई! साइबर अपराधों में इस्तेमाल अवैध सिम कार्ड बेचने वाला अधिकारी गिरफ्तार

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देशव्यापी साइबर अपराध नेटवर्क के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। सीबीआई के ‘ऑपरेशन चक्र-V’ के तहत एक दूरसंचार सेवा प्रदाता (TSP) कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने साइबर अपराधियों को हजारों की संख्या में अवैध सिम कार्ड उपलब्ध कराए जिनका इस्तेमाल मासूम लोगों को लूटने के लिए किया जा रहा था।

कौन है आरोपी और क्या है मामला?

गिरफ्तार किए गए अधिकारी की पहचान बिनु विद्याधरन के रूप में हुई है। यह कार्रवाई उस संगठित नेटवर्क को तोड़ने के लिए की गई है जो तकनीकी माध्यमों से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं। पिछले साल सीबीआई ने दिल्ली-एनसीआर और चंडीगढ़ में एक बड़े फिशिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था। यह गैंग विदेश में बैठे अपराधियों के साथ मिलकर भारतीय नागरिकों को निशाना बना रहा था। जांच में पता चला कि दूरसंचार विभाग (DoT) के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए करीब 21,000 सिम कार्ड फर्जी तरीके से हासिल किए गए थे। इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल ‘बल्क एसएमएस’ (थोक में संदेश) भेजकर लोगों को फंसाने के लिए किया जा रहा था।

कैसे बनाई गई फर्जी कर्मचारियों की फौज?

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि एरिया सेल्स मैनेजर के पद पर तैनात बिनु विद्याधरन ने फर्जी केवाईसी (KYC) करवाने में सक्रिय भूमिका निभाई:

  1. उसने ‘लॉर्ड महावीर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
  2. निर्दोष लोगों को इस कंपनी का कर्मचारी बताकर उनके नाम पर सिम कार्ड जारी किए गए।
  3. बेंगलुरु का परिवार: जांच में पाया गया कि बेंगलुरु के एक ही परिवार के सदस्यों को भी इस फर्जी कंपनी का कर्मचारी दिखा दिया गया था। सीबीआई ने इन व्यक्तियों के आधार कार्ड की प्रतियां आरोपी अधिकारी के पास से बरामद की हैं।

क्या होती है फिशिंग और कैसे बचें?

अधिकारियों के अनुसार फिशिंग साइबर ठगी की पहली सीढ़ी है। अपराधी थोक में मैसेज या कॉल भेजकर लोगों को सस्ते लोन, भारी मुनाफे वाले निवेश या पुलिस की धमकी जैसे झांसे देते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति मैसेज में दिए गए लिंक पर क्लिक करता है या अपनी निजी जानकारी साझा करता है, अपराधी उसके बैंक खाते को खाली कर देते हैं।

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