दिल्ली। सीबीएसई ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। इस बार करीब 17 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों को ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के जरिए डिजिटल तरीके से जांचा जाएगा।
बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक आयोजित होगी। इसके तहत लगभग 1 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं के 32 करोड़ पन्ने स्कैन कर कंप्यूटर सिस्टम पर अपलोड किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के अनुसार, परीक्षा केंद्रों पर छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर हाई-सिक्योरिटी सिस्टम में अपलोड किया जाएगा।
हर कॉपी को एक यूनिक कोड दिया जाएगा, जिससे मूल्यांकन के दौरान परीक्षक को छात्र का नाम और रोल नंबर दिखाई नहीं देगा।
इससे निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। शिक्षक अपने ही स्कूल की कंप्यूटर लैब से लॉगइन कर डिजिटल कॉपियों की जांच करेंगे, जिससे कॉपियों के परिवहन में लगने वाला समय और खर्च दोनों बचेंगे।
ऑन-स्क्रीन मार्किंग के सात चरणों में पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। पहले चरण में छात्र ऑफलाइन परीक्षा देंगे। इसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग, डिजिटल अपलोड, शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन मूल्यांकन, ऑटो टोटलिंग, मॉडरेशन और अंत में अंक सीधे सीबीएसई के रिजल्ट डेटाबेस में पहुंच जाएंगे। इससे मैनुअल एंट्री, दोबारा जांच और अंकों के ट्रांसफर जैसी त्रुटियों की संभावना खत्म होगी।
सीबीएसई के अनुसार, 10वीं कक्षा की कॉपियों की जांच पहले की तरह कागज पर ही होगी। डिजिटल मूल्यांकन के लिए स्कूलों में कंप्यूटर लैब, स्थिर इंटरनेट और निर्बाध बिजली व्यवस्था अनिवार्य की गई है। साथ ही शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और तकनीकी सहायता के लिए कॉल सेंटर भी बनाए जाएंगे।
बोर्ड का मानना है कि इस नई प्रणाली से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक भरोसेमंद बनेगी, जिससे छात्रों को समय पर और कम विवाद के साथ परिणाम मिल सकेंगे।











