हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत में सीजेआई सूर्यकांत का संदेश: सहयोग, धैर्य और संवैधानिक मर्यादा ही विधिक करियर की असली पूंजी…

रायपुर / छत्तीसगढ़

रायपुर। हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करते हुए कहा कि लंबे और सार्थक विधिक करियर के लिए सहयोग की भावना और धैर्य सबसे अधिक आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं, पर उन्हें मानसिक बोझ न बनने दें। इस अवसर पर विश्वविद्यालय टॉपर जस कौर बिंद्रा को सर्वाधिक 12 स्वर्ण पदक मिले। समारोह में 6 पीएचडी, 88 एलएलएम और 148 बीए-एलएलबी छात्रों को उपाधि प्रदान की गई, जबकि 13 छात्रों को कुल 36 स्वर्ण पदक दिए गए।

संवैधानिक न्यायालय लोकतंत्र के आधुनिक किले
दीक्षांत के बाद बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में सीजेआई ने छत्तीसगढ़ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि जैसे यहां के 36 किले मूल्यों की रक्षा करते थे, वैसे ही संवैधानिक न्यायालय लोकतंत्र के आधुनिक किले हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये किले सीमाओं की नहीं, बल्कि सत्ता की संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं। उन्होंने बस्तर, दंतेवाड़ा और सरगुजा जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक न्याय की संवेदनशील पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया। इस दौरान छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की यात्रा को दर्शाने वाली ई-स्मारिका ‘नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी’ का डिजिटल विमोचन भी किया गया। समारोह में पी.एस. नरसिम्हा, प्रशांत कुमार मिश्रा, पी. सैम कोशी सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश उपस्थित रहे।

न्यायिक अकादमी: भविष्य गढ़ने का केंद्र
सीजेआई ने कहा कि न्यायिक अकादमी केवल प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि न्यायपालिका के भविष्य को गढ़ने वाली संस्था है, जहां संवैधानिक मूल्यों और कार्य संस्कृति की नींव रखी जाती है। उन्होंने दोहराया कि भौगोलिक कठिनाइयों या दूरी के कारण किसी भी नागरिक को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने स्वागत भाषण में सीजेआई की उपस्थिति को राज्य की न्यायपालिका के लिए प्रेरणास्रोत बताया। अंत में संजय के. अग्रवाल के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह संपन्न हुआ।

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