सोनाक्षी के साहस और चिरायु योजना ने बदल दी जिंदगी

महासमुंद। महासमुंद जिले के ग्राम कुल्हरिया में रहने वाली 12 वर्षीय सोनाक्षी एक साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से है। उनके पिता श्री किशन लाल दीवान मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सोनाक्षी शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला पथर्री में कक्षा सातवीं की छात्रा है और अन्य बच्चों की तरह वह भी अपने भविष्य को लेकर बड़े सपने देखती थी। लेकिन बचपन से ही उसकी कमजोर सेहत उसके सपनों की राह में बाधा बन रही थी।
जब सोनाक्षी कक्षा पाँचवीं में पढ़ती थी, तब स्कूल में हुए चिरायु स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान उसमें हृदय रोग के लक्षण पाए गए। उसे अक्सर सांस फूलने, जल्दी थक जाने, पैरों में सूजन, अनियमित दिल की धड़कन और बार-बार सर्दी-खांसी की समस्या रहती थी। चिरायु टीम के आयुष चिकित्सकों द्वारा परिजनों को इसकी जानकारी दी गई और नि:शुल्क इलाज के बारे में समझाया गया। हालांकि सोनाक्षी देखने में स्वस्थ लगती थी, इसलिए शुरुआत में परिवार ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। विद्यालय के प्रधान पाठक श्री मोहन लाल साहू और चिरायु टीम के सदस्यों ने लगातार परिवार को जागरूक किया। फार्मासिस्ट धनेश्वर दीवान और एएनएम श्रीमती विशाखा साहू समय-समय पर सोनाक्षी की स्थिति पर नजऱ रखते रहे और उसके माता-पिता को इलाज के लिए प्रेरित करते रहे। धीरे-धीरे सोनाक्षी ने स्वयं हिम्मत दिखाई और अपने माता-पिता को हृदय जांच के लिए तैयार किया।

चिरायु टीम के सहयोग से सोनाक्षी को रायपुर स्थित एम एम आई नारायणा अस्पताल, रायपुर ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा उसकी विस्तृत जांच की गई। जांच में यह पाया गया कि उसके दिल में 24 म 19 मिमी का छेद है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक था। डॉक्टरों ने परिजनों को इसकी गंभीरता समझाते हुए जल्द सर्जरी कराने की सलाह दी। परिवार के लिए यह समय बहुत कठिन था, लेकिन चिरायु योजना ने उन्हें उम्मीद दी। योजना के अंतर्गत सोनाक्षी की सर्जरी पूरी तरह नि:शुल्क की गई। अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसके दिल के छेद को ठीक किया। यह सर्जरी सोनाक्षी के लिए एक नया जीवन लेकर आई।

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