रायगढ़ में अफीम की खेती पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: 72 घंटे में तमनार से लैलूंगा तक ताबड़तोड़ एक्शन; ड्रोन से पकड़ी गई 2 करोड़ की फसल

रायगढ़। रायगढ़ जिले में अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी और एसएसपी शशिमोहन सिंह के नेतृत्व में पिछले 72 घंटों के भीतर अफीम की खेती के तीन बड़े मामलों का भंडाफोड़ किया गया है। दुर्गम इलाकों में छिपी इस अवैध खेती को पकड़ने के लिए प्रशासन ने ड्रोन तकनीक का सहारा लिया।

सब्जी की आड़ में लहलहा रही थी अफीम

प्रेस वार्ता के दौरान एसएसपी शशिमोहन सिंह ने बताया कि 19 मार्च को तमनार के आमाघाट में पहली बड़ी कार्रवाई हुई। यहाँ सब्जी की खेती के बीच में अफीम के 60,326 पौधे उगाए जा रहे थे, जिनकी बाजार में कीमत करीब 2 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस ने झारखंड निवासी मुख्य आरोपी मार्शल सांगा को हिरासत में लिया है। मौके पर रोटावेटर और जेसीबी चलाकर पूरी फसल को नष्ट कर दिया गया।

ड्रोन सर्वे से लैलूंगा में भी भंडाफोड़

सोमवार (23 मार्च) को लैलूंगा तहसील के नवीन घटगांव और मुड़ागांव में ड्रोन सर्वे के दौरान अफीम की खेती के नए मामले सामने आए। आरोपी सादराम नाग अपने खेत में साग-भाजी के बीच अफीम उगा रहा था। अभिमन्यु नागवंशी और तानसिंह नागवंशी के घर से अफीम की सूखी फसल और अवशेष बरामद किए गए। आरोपी टीम के पहुंचने पर साक्ष्य मिटाने की कोशिश कर रहे थे, जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया।

बख्शे नहीं जाएंगे दोषी: कलेक्टर

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की खेती एक गंभीर अपराध है और इसमें संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन ने सभी अनुविभागों में ड्रोन सर्वे अभियान चला रखा है ताकि उन क्षेत्रों तक भी नजर रखी जा सके जहाँ पहुंचना मुश्किल है। पुलिस अब नारकोटिक्स विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर पौधों के नमूनों की जांच करवा रही है, जिसके आधार पर एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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