नौकरी के नाम पर बेरोजगारों से ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय ठग गिरोह के 9 सदस्य 10 लाख 50 हजार नकदी के साथ गिरफ्तार

बलौदाबाजार। पुलिस ने नौकरी लगाने के नाम से झांसा देने वाले अंतर्राज्यीय ठग गिरोह के 9 सदस्यों को पकड़ा है। ठगों के पास से 10 लाख 50 हजार नगद के अलावा फर्जी चयन सूची, नियुक्ति आदेश, प्रिंटर ,फर्जी सील बनाने का उपकरण जब्त किया गया है। प्रकरण का दिलचस्प पहलू यह हैं कि गिरोह के मास्टरमाइंड बिहार के शेखपुरा जिला निवासी रविशंकर प्रसाद ने 4 माह पहले ही पीएनबी की बैंक मैनेजर को बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी में अच्छी पोस्ट पर नौकरी करने का झांसा देकर शादी कर ली थी। आरोपी की असलियत सामने आने पर अब उसकी बैंक मैनेजर पत्नी उससे तलाक लेने की तैयारी कर रही है। आरोपी रविशंकर इतना शातिर था कि ठगी करने लिये लोगो को अपने झूठे नाम बता कर बात करता था। यहां तक कि उसके गिरोह के कोर टीम के सदस्यों को भी उसका नाम तक पता नही था।

मिली जानकारी के अनुसार थाना भाटापारा में ग्राम पनगांव थाना सिटी कोतवाली निवासी प्रार्थी रामशंकर पटेल ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि 8 जनवरी 20 से 31 मार्च 21 के मध्य सुशोभन घोष म द्वारा फोन कर रेल्वे में नौकरी लगाने के नाम पर अपने साथियों म साथ मिलकर ढाई लाख रुपये की धोखाधड़ी की हैं। पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज किया था। इसके अतिरिक्त थाना सिमगा में ग्राम पौसरी थाना सिमगा निवासी रूपांशु साहू ने एफआईआर दर्ज करवाई थी। जिसके अनुसार आरोपी देवा पात्रे ने उसे और उसके साथियों नरेंद्र गायकवाड़ व दुर्गेश साहू को रायपुर बुलवाकर वन विभाग के दो कथित अधिकारियो अमित सिंह व चंचल पाल से मिलवाया। आरोपी अमित सिंह ने नौकरी लगवाने का झांसा देकर पीड़ितों से वन विभाग का फर्जी आवेदन पत्र भरवा कर 4 लाख 15 हजार रुपये की धोखाधड़ी कर लिया हैं।

दोनो शिकायतो में समानता होने के कारण किसी बड़े गिरोह की संलिप्तता के मद्देनजर पुलिस की जांच शुरू की गई। आरोपियो के वारदात के तरीके को समझकर आरोपियो की गिरफ्तारी व तकनीकी साक्ष्य संकलन हेतु 10 पुलिस की टीमें तैयार की गई। पुलिस को जांच में पता लगा कि गिरोह का सरगना कलकत्ता से रायपुर आने वाला है। पुलिस ने रायपुर में जाल बिछा कर मुख्य सरगना रविशंकर निवासी कलकत्ता को पकड़ा। रविशंकर मूलतः बिहार का रहने वाला है।

पूछताछ में पता चला कि रविशंकर ही गिरोह का मास्टरमाइंड हैं और उसी ने गिरोह बनाया था। उससे पूछताछ व उसके मोबाइल से मिले चैटिंग के आधार पर उसके गिरोह के सदस्य अमित सिंह को भिलाई से पकड़ा गया। अमित सिंह फर्जी दस्तावेज तैयार करवा कर आवेदकों को उपलब्ध करवाता था। इसके साथ ही 8 अन्य आरोपियो सन्तोष कुमार साहू, सौरभ चक्रवर्ती,देव प्रसाद पात्रे, अमित कुमार शास्त्री देवा साहू, राजेन्द्र ठाकुर को भिलाई, कोरबा ,रायगढ़, बेमेतरा, जांजगीर, रायपुर, से दबिश देकर पकड़ा गया। आरोपियो के कब्जे से क़ई फर्जी दस्तावेज व सबूत भी मिले।

इंजीनियरिंग कर अपने इंजीनियर साथी के साथ बनाया गैंग
अन्तर्राज्यीय गिरोह का मुख्य सरगना रविशंकर मूलतः बिहार का रहने वाला है। उसने भिलाई के शंकराचार्य इंजीनियरिंग कालेज से इंजीनियरिंग की थी। इंजीनियरिंग के दौरान होने वाले इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग में वह रायगढ़ निवासी सौरभ चक्रवर्ती से मिला था। सौरभ उस दौरान राजधानी के दिशा इंजीनियरिंग कालेज से इंजीनियरिंग कर रहा था। बाद में दोनो ने नौकरी न कर ठगी हेतु गिरोह बना लिया था। आरोपी रविशंकर साहू इतना शातिर हैं कि गिरोह में सौरभ चक्रवर्ती के अलावा अन्य कोई भी उसका असली नाम नही जानता था। अपने गिरोह के अन्य सदस्यों से वह फर्जी नामो से बात करता था। आरोपी ने अपने अंदर एजेंट रखे थे, एजेंट सन्तोष साहू, देवप्रसाद पात्रे, चंचल पाल, देवानंद साहू, लोगों को वन विभाग,आर्मी,बिजली विभाग,रेल्वे में नौकरी लगाने का झांसा देते थे।

ठाकुर राजेन्द्र सिंह ने फर्जी सील मुहर तैयार की थी। अमित सिंह फर्जी दस्तावेज चयन सूची व नियुक्ति सूची तैयार कर आवेदकों को उपलब्ध करवाता था। अमित कुमार शास्त्री के खाते में आरोपियो द्वारा नौकरी लगाने के नाम से रकम मांगी जाती थी। इसके बाद सौरभ चक्रवर्ती आवेदकों को रेलवे स्टेशन बुला कर ट्रेनिंग देने का दिखावा करता था। इसके अलावा विभिन्न कार्यालयों के बाहर बुलवा कर उनसे नियुक्ति पत्र देकर उन्हें जॉइनिंग का स्थान भी बताता था।

आरोपियों में रविशंकर कोलकता,अमित सिंह 38 वर्ष भिलाई थाना जामुल जिला दुर्ग, संतोष कुमार साहु 36 वर्ष निवासी मुडुता नवागढ जिला बेमेतरा,सौरभ चक्रवर्ती 29 वर्ष निवासी ग्राम विकाश नगर, रायगढ, देव प्रसाद पात्रे उर्फ़ देवा 31 साल अमय विहार तेलीबांधा रायपुर,चंचल पाल 50 साल भिलाई, अमित कुमार शास्त्री 32 साल शिवरीनारायण जांजगीर चांपा, देवानंद साहू उर्फ़ देवा 29 साल जांजगीर-चाम्पा, ठाकुर राजेन्द्र कुमार 50 साल थाना कोतवाली कोरबा।

 

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