बिलासपुर: हाईकोर्ट में मंगलवार को स्मार्ट सिटी मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कंपनी की तरफ से पैरवी की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई सुनवाई में उन्होंने कहा कि, स्मार्ट सिटी को निगम से कार्य स्वीकृति कराने की आवश्यकता नहीं है। इसलिए उसको प्रोजेक्ट के काम शुरू करने के अनुमति दें।
इसका याचिकाकर्ता के वकील सुदीप श्रीवास्तव ने विरोध करते हुए संवैधानिक संस्थाओं के अधिकार पर अतिक्रमण बताया। रायपुर बिलासपुर नगर निगम की मेयर इन काउंसिल व सामान्य सभा ने अपने जवाब में कहा कि कार्यों की स्वीकृति उनके माध्यम से होनी चाहिए। पिछली सुनवाई के दौरान बिलासपुर और रायपुर नगर निगम की सामान्य सभा और मेयर इन काउंसिल को भी पक्षकार बनाया गया था। उन्होंने हाईकोर्ट में कहा है कि स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों का अनुमोदन सामान्य सभा व एमआईसी से कराना चाहिए। साथ ही स्मार्ट सिटी के निदेशक मंडल में निगम के निर्वाचित प्रतिनिधि शामिल करने चाहिए, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिवक्ता ने स्थगन आदेश समाप्त करने की मांग की।
बिलासपुर के अधिवक्ता विनय दुबे की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव और गुंजन तिवारी के माध्यम से दायर जनहित याचिका प्रस्तुत की है। इनमें बिलासपुर और रायपुर नगर निगम में कार्यरत स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनियों को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि इन्होंने निर्वाचित नगर निगमों के सभी अधिकारों और क्रियाकलाप का असंवैधानिक रूप से अधिग्रहण कर लिया है। जबकि ये सभी कंपनियां विकास के वही कार्य कर रही है, जो संविधान के तहत संचालित प्रजातांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचित नगर निगमों के अधीन है। विगत 5 वर्षों से कराए गए कार्य की प्रशासनिक या वित्तीय अनुमति नगर निगम मेयर इन काउंसिल या सामान्य सभा से नहीं है।

