नई दिल्ली: भारत में कोरोना से 47 लाख लोगों की मौत का आंकड़ा सुनकर हर कोई डर सकता है। जब यह आंकड़ा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से सुना तो वह भी दंग रह गए। उन्होंने साफ तौर पर कहा है यह आंकड़ा सही नहीं। कोरोना से मरने वालो की रिपार्ट कल जारी हुई, जिसमे भारत में 47 लाख लोगों की मौत का अनुमान लगाने के लिए प्रयुक्त ‘मॉडलिंग’ पद्धति पर सवाल उठाए हैं।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) वी के पॉल और एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया सहित कई विशेषज्ञों ने रिपोर्ट को अस्वीकार्य बताया है, साथ ही इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।
दरअसल WHO ने बताया कि कोरोना के चलते 2021 में दुनिया में 1.50 करोड़ लोगों की मौत हुई है। गुरुवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक डब्ल्यूएचओ का दावा है कि भारत में 47 लाख मौतें हुई हैं। यह आधिकारिक आंकड़े से करीब 10 गुना अधिक है। वहीं दूसरी ओर भारत सरकार ने डब्ल्यूएचओ के आकलन के तरीके पर सवाल उठाते हुए स्टडी मॉडल को संदेहपूर्ण बताया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार हम आधिकारिक चैनल के जरिए विरोध दर्ज कराएंगे। डेटा पर आपत्तियों को एक्जीक्यूटिव बोर्ड में रखा जाएगा। केंद्र सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि यह डेटा 17 राज्यों के आधार पर हैं। इन राज्यों को किस आधार पर चुना गया, डेटा कब लिया गया, इसकी जानकारी हमें नहीं दी गई।
सरकार ने इस संबंध में 10 पत्र लिखे पर डब्ल्यूएचओ ने जवाब नहीं दिया। एम्स दिल्ली के डॉयरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भारत में जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रेशन का सशक्त सिस्टम है। उसके अनुसार इतनी ज्यादा मौतें सामने नहीं आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में कोरोना से 5.24 लाख लोगों की मौत हुई है।

