अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित समारोह में पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष ने बुजुर्गों को किया सम्मानित

 रायपुर : अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर आयोजित समारोह में पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बुजुर्गों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ट्रेन में सीनियर सिटीजन के लिए सुविधाएं मिलती हैं। यहां बसों में भी बुजुर्गों को मुफ्त यात्रा सुविधा मिलनी चाहिए। वहां मौजूद एक अधिकारी ने कह दिया कि सरकारी बसों में यह सुविधा मिल रही है।

महिला, बाल विकास और समाज कल्याण विभाग ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर रायपुर के सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय सम्मान समारोह आयोजित किया। इसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे थे।

अपनी बात रखते हुए उन्होंने बुजुर्गों के कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की चर्चा की। उन्होंने मंच से ही समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी से पूछा की जब ट्रेन में बुजुर्गो को सुविधाएं मिलती है तो बस में मुफ्त यात्रा भी मिलना चाहिए।

जवाब में अधिकारी की ओर से बताया गया कि बुजुर्गों के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा सरकार ने पहले ही दे रखी है। इस पर महंत ने कहा कि कितनी सरकारी बसें राज्य में चलती हैं यह भी देखा जाना चाहिए।

डॉ. महंत ने कहा, बुजुर्गों के प्रति पहली जिम्मेदारी उनके बच्चों के साथ पूरे समाज की है। राज्य सरकार ने पेंशन सहित बुजुर्गों के जरूरत के लिए कई व्यवस्थाएं की है। अब बुजुर्गों की मदद के लिए हेल्पलाइन भी शुरू की जा रही है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों के लिए आत्मीयता और मान-सम्मान सबसे बड़ी जरूरत है इस दिशा में नौजवानों को सोचना होगा। कार्यक्रम को समाज कल्याण मंत्री अनिला भेंडिया, योग आयोग के अध्यक्ष ज्ञानेश शर्मा सहित विभिन्न जिलों से आए लगभग तीन हजार बुजुर्ग शामिल हुए।

बुजुर्ग गणमान्यों को सम्मानित किया गया

इस अवसर पर 16 बुजुर्गों का समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह से सम्मान किया गया। इसमें सूफी गायक पद्मश्री मदन चौहान और समाज सेविका पद्मश्री शमशाद बेगम, चित्तरंजन कर, नित्यानंद शर्मा, बीरझु सिंह, नबी मोहम्मद, राजू राम मरकाम समेत कई लोग शामिल थे।

बढ़ती उम्र के बावजूद जज्बा बरकरार

समारोह में कई ऐसे बुजुर्ग आये थे, जिनकी बढ़ी उम्र उनके जज्बों को नहीं रोक पाई। उनमें से एक अख्तर हुसैन कुरैशी ने हाथ में बड़ा सा तिरंगा पकड़ा हुआ था। दैनिक भास्कर से चर्चा में उन्होंने बताया कि वे कश्मीर से कन्याकुमारी तक पैदल यात्रा कर चुके है। हिन्दू, मुस्लिम,सिख,ईसाई के बीच भाईचारा बना रहे, इसके लिए उन्होंने यात्रा की है। साथ ही कहा कि जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता वो लोगों को जागरूक करते रहेंगे।

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