लाल आतंक से मुक्ति का संकल्प, दंतेवाड़ा से देश को अमित शाह का संदेश,बोले- अगली चैत्र नवरात्रि को मनाएंगे ‘लाल आतंक मुक्त बस्तर’ का पर्व, राम के ननिहाल से लिया संकल्प

दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा की पावन धरती आज ऐतिहासिक पल की साक्षी बनी, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम महोत्सव के समापन समारोह में भाग लिया और देश के नाम एक बड़ा संदेश दिया।
आज अष्टमी भी थी, और राम नवमी भी। अमित शाह बोले— मैं आज दंतेश्वरी देवी का आशीर्वाद और संकल्प लेकर आया हूँ, कि अगली चैत्र नवरात्रि से बस्तर की धरती पर लाल आतंक की परछाईं नहीं रहेगी। यह मेरा प्रण है और माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि से इसका उद्घोष कर रहा हूँ।

गृह मंत्री ने मंच से कहा कि अब बस्तर की पहचान नक्सलवाद नहीं, बल्कि लोक संस्कृति, आदिवासी परंपराओं और विकास से होगी। उन्होंने पूरे आत्मविश्वास से ऐलान किया कि अगले वर्ष इस महोत्सव में देशभर के आदिवासी शामिल होंगे, और यहाँ देश की विविध आदिवासी कलाओं का संगम दिखाई देगा।

अमित शाह ने कहा, मैं आज राम के ननिहाल में हूँ। बस्तर की यह पवित्र भूमि, जहाँ प्रभु श्रीराम ने अपने वनवास का लंबा समय बिताया, अब हिंसा और आतंक से नहीं, राम के आदर्शों से प्रेरित होकर आगे बढ़ेगी।

उन्होंने इस मौके पर छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की विशेष प्रशंसा की। गृह मंत्री ने कहा, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आदिवासियों को वर्षों से लूट रहे बिचौलियों की व्यवस्था को तोड़ा है। अब तेंदूपत्ता की खरीदी सरकार सीधे आदिवासियों से करेगी — वो भी 4,000 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से, जो एक ऐतिहासिक फैसला है।

उन्होंने दो टूक कहा— जो लोग दशकों से आदिवासियों को डर, धोखा और दलाली में फँसाए हुए थे, अब उनका युग समाप्त हो गया है। बस्तर अब आगे बढ़ेगा, विकास की राह पर।

अंत में गृह मंत्री ने विश्वास दिलाया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर बस्तर को शांति, संस्कृति और समृद्धि का केंद्र बनाएंगे। अब बस्तर की पहचान डर नहीं, बल्कि गौरव होगी।

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