छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा और जेलों में गंभीर मसलों पर जताई नाराजगी…अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षा और जेलों से जुड़े मामलों में शासन और अधिकारियों की कार्यवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है। शिक्षा के अधिकार (RTE) मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने शिक्षा सचिव की गैर हाजिरी पर फटकार लगाई। अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि कोर्ट को मजाक में न लिया जाए और अगली सुनवाई में स्कूल शिक्षा सचिव स्वयं शपथ पत्र पेश करें।

इस जनहित याचिका को भिलाई निवासी भगवंत राव ने अपने वकील देवर्षि ठाकुर के माध्यम से दायर किया था। बेंच ने कहा कि गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन कर बड़े लोगों के बच्चों का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर एडमिशन कराने पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई 17 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।

वहीं, प्रदेश की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से अधिक होने के मामले पर भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। मंगलवार को सुनवाई में वरिष्ठ सहायता कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति पर बहस हुई। शासन ने बताया कि पांच केंद्रीय जेलों में से केवल दो में ही अधिकारी हैं, जबकि बाकी तीन में नियुक्ति होना शेष है। याचिकाकर्ता शिवराज सिंह के अधिवक्ता ने कहा कि सभी जिला जेलों में नियम अनुसार सहायता अधिकारी होना अनिवार्य है।

चीफ जस्टिस की बेंच ने शासन से उचित कदम उठाने का निर्देश दिया और 8 दिसंबर तक शपथ पत्र में विस्तृत जवाब मांगा। वर्तमान में प्रदेश की 15 हजार कैदियों की क्षमता वाली जेलों में 20,500 से अधिक कैदी बंद हैं।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इन मामलों में स्पष्ट संदेश दिया कि शासन और अधिकारी बच्चों के अधिकार और जेल प्रशासन में नियमानुसार कदम उठाएं।

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