वेदांता प्लांट हादसा: उच्चस्तरीय जांच शुरू, अब तक 24 मजदूरों की मौत, 29 अप्रैल तक मांगे गए साक्ष्य

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर लिमिटेड में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट ने औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। 14 अप्रैल को हुए इस दर्दनाक हादसे में मरने वाले मजदूरों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है, जबकि 10 श्रमिक अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। घटना की भयावहता को देखते हुए राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

संभागायुक्त को सौंपी गई जांच की कमान

बिलासपुर संभाग के आयुक्त सुनील जैन को इस पूरे मामले का जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए प्रशासन ने आम जनता और प्रत्यक्षदर्शियों से सहयोग मांगा है। यदि किसी के पास हादसे से जुड़े तथ्य, फोटो, वीडियो या दस्तावेज हैं, तो वे 29 अप्रैल 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच बिलासपुर आयुक्त कार्यालय में प्रस्तुत कर सकते हैं।

कैसे हुआ हादसा?

डभरा ब्लॉक के सिंघीतराई स्थित इस प्लांट के बॉयलर यूनिट–1 में तकनीकी खराबी के कारण अचानक विस्फोट हुआ। उस समय वहां 34 श्रमिक तैनात थे। धमाका इतना जबरदस्त था कि मौके पर मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। शुरुआती जांच में मशीनरी के रखरखाव और संचालन मानकों की अनदेखी की बात सामने आ रही है। सुरक्षा ऑडिट में कमी और प्रबंधन की लापरवाही इस बड़े हादसे का मुख्य कारण मानी जा रही है।

मुआवजे का मरहम

हादसे के बाद केंद्र और राज्य सरकार सहित कंपनी प्रबंधन ने मुआवजे की घोषणा की है:

  • राज्य सरकार: मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये।
  • PMNRF (केंद्र): मृतकों के परिजनों को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये।
  • वेदांता प्रबंधन: मृतक के परिजनों को 35-35 लाख रुपये एवं एक सदस्य को नौकरी, वहीं घायलों को 15-15 लाख रुपये देने का वादा किया है।

इस उच्चस्तरीय जांच का मुख्य उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना और दोषियों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रशासन ने अपील की है कि न्याय की इस प्रक्रिया में साक्ष्य रखने वाले नागरिक बढ़-चढ़कर आगे आएं।

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