पहले देश में डायबिटीज और हाई बीपी के मरीज कम थे। मगर नब्बे के दशक में अचानक से ज्यादातर घरों में कोई न कोई हाई बीपी या डायबिटीज का पेशेंट हो गया। बहुत सारी वजहें हैं, जिनमें हमारे खानपान में बदलाव को सबसे खास माना जा सकता है। बदलाव के उस दौर में एक चीज बहुत ख़ास थी जो खो गयी और वो है दातून। गाँव देहात में आज भी लोग दातून इस्तमाल करते दिख जाएंगे लेकिन शहरों में दातून पिछड़ेपन का संकेत बन चुका है। गाँव देहात में डायबिटीज़ और हाइपरटेंशन के रोगी यदा कदा ही दिखेंगे या ना के बराबर ही होंगे। वजह साफ है, ज्यादातर लोग आज भी दातून करते हैं। आप सोच रहे होंगे कि डायबिटीज़ और हाइ ब्लड प्रेशर के साथ दातून का क्या संबंध है? लेकिन सच्चाई जानेंगे तो आपका दिमाग हिल जाएगा। साइंटिस्ट और हर्बल मेडिसिन एक्सपर्ट दीपक आचार्य के मुताबिक दातून से आप डायबिटीज के रोगी बनने से बच सकते हैं। जानते हैं कैसे?दातून के फायदे
बबूल और नीम की दातून को लेकर एक क्लिनिकल स्टडी ‘जर्नल ऑफ क्लिनिकल डायग्नोसिस एंड रिसर्च’ में छपी और बताया गया कि स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटेंस की वृद्धि रोकने में ये दोनों जबर्दस्त तरीके से कारगर हैं। ये वही बैक्टीरिया हैं जो दांतों को सड़ाता है और कैविटी का कारण भी बनता है। वो सूक्ष्मजीव जो नाइट्रिक ऑक्साइड बनाते हैं जैसे एक्टिनोमायसिटीज़, निसेरिया, शालिया, वीलोनेला आदि दातून के शिकार नहीं होते क्योंकि इनमें वो हार्ड केमिकल कंपाउंड नहीं होते जो माउथवॉश और टूथपेस्ट में डाले जाते हैं।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी फिटनेस व्यवस्था या चिकित्सकीय सलाह शुरू करने से पहले कृपया डॉक्टर से सलाह लें।











