डर और दहशत के बाद भी बस्तर फाइटर्स में भर्ती होने पहुंचे युवा

जगदलपुर। बस्तर संभाग के सातों जिलों में बस्तर फाइटर्स में 9 मई से भर्ती प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस फोर्स में भर्ती होने अंदरूनी इलाकों के युवक-युवतियों में जितना जोश देखने को मिल है, उतना ही उन्हें नक्सलियों का डर भी सता रहा है। युवाओं ने कहा कि, हम फोर्स में भर्ती होने आए हैं। इसकी भनक नक्सलियों को लगी तो परिवार वालों को भी प्रताड़ित करेंगे। कई युवा नक्सल हिंसा पीड़ित भी हैं।

नक्सलियों की दहशत की वजह से कुछ युवाओं ने अपना नाम तक लिखने से मना कर दिया। दंतेवाड़ा जिले के एक धुर नक्सल प्रभावित गांव से पहुंचे कुछ युवकों ने कहा कि, हमें नौकरी करनी है। पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे। ‘अंदर वालों’ के जुल्म से अब तंग आ गए हैं , न सड़क बनने देते हैं और न ही गांव का विकास होने दे रहे हैं। बस्तर में ‘अंदर वाले’ शब्द का इस्तेमाल नक्सलियों के लिए किया जाता है।

कुछ महीने पहले बस्तर फाइटर्स में भर्ती होने के लिए दंतेवाड़ा के स्थानीय युवाओं को पुलिस ने प्रशिक्षण दिया था। अंदरूनी इलाके से पहुंचे युवक-युवतियों के लिए रहने और खाने का बंदोबस्त भी पुलिस ने किया था। प्रशिक्षण खत्म होने के कुछ दिनों बाद भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। लेकिन, किसी कारण से तारीखों का ऐलान नहीं हो सका था। जिससे प्रशिक्षण खत्म होने के बाद कई युवा अपने घर नहीं लौटे।

कुछ युवाओं ने बताया कि नक्सलियों को पता चल गया था कि हम फोर्स में भर्ती होने के लिए आए हैं। परिवार वालों को धमकी दी थी और परेशान किया था। यदि घर जाते तो हमें मार देते। इसी डर की वजह से शहर में अपने रिश्तेदारों या फिर किसी परिचित के यहां रुक कर भर्ती की तारीख का ऐलान होने का इंतजार कर रहे थे। चयन हो जाता है तो नौकरी करेंगे और नहीं तो शहर में ही रहकर कुछ और काम करेंगे।

बस्तर संभाग के सातों जिलों में करीब 2100 पदों के लिए (प्रति जिला 300) 53 हजार से ज्यादा आवेदन आए हैं। भर्ती प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। पहले चरण में फिलहाल अभी युवाओं के दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। इसके बाद फिजिकल टेस्ट होगा। बस्तर समेत, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर में हर दिन सुबह से ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाती है। SP सिद्धार्थ तिवारी ने बताया कि सिर्फ दंतेवाड़ा में ही 3500 आवेदन आए हैं।

हर जिलों में बस्तर फाइटर्स फोर्स में स्थानीय युवाओं की भर्ती से बड़ा फायदा मिलेगा। एक तरफ जहां नक्सलगढ़ के युवा रोजगार से जुड़ेंगे, वहीं दूसरी तरफ नक्सली भी बैक फुट पर होंगे। स्थानीय युवा बस्तर के जल-जंगल-जमीन से अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसलिए नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में जवानों को सफलता मिलेगी। इधर, नक्सली भी बस्तर फाइटर्स फोर्स का लगातार विरोध कर रहे हैं। कई जगह बैनर-पोस्टर चस्पा कर स्थानीय युवाओं को फोर्स में भर्ती होने से मना किए हैं।

 

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